मोहब्बत के नशे में चूर हैं हम
हर इक ग़म की पहुँच से दूर हैं हम

कई आँखें हमें पहचानती हैं
हसीनों में बहुत मशहूर हैं हम

बस अब जैसे हैं तेरे सामने हैं
बता अब क्या तुझे मंज़ूर हैं हम

वफ़ा ईमान-दारी बे-नियाज़ी
पुराने वक़्त का दस्तूर हैं हम

वो इस दर्जा हसीं है क्या बताएँ
मोहब्बत के लिए मजबूर हैं हम

अभी तो प्यार से देखा है उस ने
अभी दिल्ली से काफ़ी दूर हैं हम

- महशर आफ़रीदी