अपने ख़ाली-पन को भरना छोड़ दिया
तन्हाई से बिल्कुल डरना छोड़ दिया

अब तो मुझ को मेरे हाल में जीने दो
अब तो मैं ने तुम पे मरना छोड़ दिया

तुम को हिचकी आने से भी दिक़्क़त थी
मैं ने तुम को याद ही करना छोड़ दिया

आख़िर तुम पर हिज्र असर-अंदाज़ हुआ
तुम ने आख़िर-कार सँवरना छोड़ दिया

उस ने पिंजरा खोल के पहली ग़लती की
दूसरी ग़लती पंख कतरना छोड़ दिया

- महशर आफ़रीदी