छोटे भाई से भी जज़्बात नहीं मिलते हैं
ख़ून मिलता है ख़यालात नहीं मिलते हैं

कैसे आना हुआ क्या बात है सब ख़ैर तो है
क्यों कि सर आप तो बे-बात नहीं मिलते हैं

मेरे जज़्बात भी सच्चे हैं इरादे मज़बूत
ये भी सच है कभी दिन रात नहीं मिलते हैं

कितनी आँखें हैं जो कर देती हैं निय्यत को ख़राब
लेकिन इन में भी ख़राबात नहीं मिलते हैं

इतना ख़ाली है वो कमरा मैं जहाँ क़ैद में हूँ
ख़ुदकुशी के लिए आलात नहीं मिलते हैं

कुछ जवाबों से सवालात खड़े होते हैं
फिर सवालों के जवाबात नहीं मिलते हैं

- महशर आफ़रीदी