तेरा चेहरा फूल जैसा हो गया मेरा बेज़ारी का नक़्शा हो गया

हाथ तेरे लगने की देरी थी और

आदमी से मैं खिलौना हो गया


छिप-छिपाकर महँगी चीज़ें रखते हैं

अब ये आँसू कब से हीरा हो गया


आज मंज़िल ने तमाचा जड़ दिया

रस्ता जो टेढ़ा था सीधा हो गया


चाँद वैसे निकला था पूरा मगर

तुमको जब देखा तो आधा हो गया 


हिज्र के क़िस्सों को पढ़ते रहने से 

इश्क़ का इक्ज़ाम अच्छा हो गया


और कहीं तहरीर कर दो लफ़्ज़ों को

अब तो ये काग़ज़ भी बूढ़ा हो गया