इक तेरी तस्वीर बहा दी पानी में
ऐसे हमने आग लगा दी पानी में

तुमने पाँव में ग़ैर के घुंघरू बाँध लिए
हमने भी पाज़ेब बहा दी पानी में

चुल्लू भर पानी ही मयस्सर था हमको
क्या करते फिर नाक डुबा दी पानी में

उम्र-ए-गुज़िश्ता लौट आई, बारिश में कल
काग़ज़ की इक नाव चला दी पानी में

नाव ने पूछा कितना भरोसा करते हो
हम ने झट पतवार गिरा दी पानी में

तेरे भरोसे दरिया में उतरे थे हम
तूने तो औक़ात दिखा दी पानी में

मौजों ने दो-चार हिलोरों से 'मौजी'
तुमको नानी याद दिला दी पानी में

- मनमौजी