पापा, मम्मी कहाँ है? - नज़्म


पापा, मम्मी कहाँ है?

ख़ौफ़ खाता हूँ इस सवाल से
हूँ अभी तक तुम्हारे मलाल में
मैं तो फिर भी जी लेता हूँ तुम्हें
हमारी बेटी की आखों में
उसकी साँसों में
उसकी सदा में
लेकिन ये समझो
वो नहीं देख सकती
तुम्हें मेरी बेदार आँखों में
वो सात साल की बच्ची
नहीं जानती तुम्हारी मौजूदगी
जो है मेरी हर आह में
मेरी दबी आवाज़ में
मेरी ग़मगीन रातों में
कभी उसके ख़्वाब में आओ तुम
उसे चैन की नींद सुलाओ तुम
अपने होने का एहसास दिलाओ तुम
मैं थक के चूर हो गया
वो जो हमारी बेटी थी
अब सिर्फ़ मेरी है
उसके दिल पे उंगली रख के कहता हूँ यहाँ है
पूछती है जब वो कि पापा, मम्मी कहाँ है

- अच्युतम यादव 'अबतर'