दोस्तो, अपने जज़्बात को अलफ़ाज़ देना आसान नहीं होता और दो लाइन में तो बिल्कुल नहीं। लेकिन जब हम किसी बड़े शायर की दो लाइन की शायरी (या शे'र) पढ़ते हैं तो इस बात की बहुत संभावना होती है कि दिल से वाह निकले। चाहे साहिर लुधियानवी हों या फिर जौन एलिया, इनके अश'आर दिल को छू जाते हैं।
आज हम नए दौर की कुछ बुलंद आवाज़ों की दो लाइन की शायरी पढ़ेंगे। हिमांशी बाबरा, चराग़ शर्मा, उमैर नजमी मेरे कुछ पसंदीदा शायरों में से एक हैं। इस पोस्ट में मैंने अपनी शायरी के साथ-साथ कई नए शायरों की शायरी का संग्रह तैयार करके पेश किया है। उम्मीद करता हूँ आपको पसंद आएँगी।
Best 2 line Shayari in Hindi
अपने सामान को बाँधे हुए इस सोच में हूँ
जो कहीं के नहीं रहते वो कहाँ जाते हैं
- जव्वाद शैख़
इस वक़्त मुझे जितनी ज़रूरत है तुम्हारी
लड़ते भी रहोगे तो मोहब्बत है तुम्हारी
– ज़िया मज़कूर
कल तो शामिल था मेरी क़िस्मत में
मेरी क़िस्मत बदल गई है अब
- हिमांशी बाबरा
हम को नीचे उतार लेंगे लोग
इश्क़ लटका रहेगा पंखे से
– ज़िया मज़कूर
एक ग़ज़ल से जिसकी मूरत मैंने आज बनाई है
एक दफ़ा जो वो पढ़ ले तो प्राण प्रतिष्ठा हो जाए
- तनोज दाधीच
मैं ने चाहा था ज़ख़्म भर जाएँ
ज़ख़्म ही ज़ख़्म भर गए मुझ में
- अम्मार इक़बाल
तुम बनाओ किसी तस्वीर में कोई रस्ता
मैं बनाता हूँ कहीं दूर से आता हुआ मैं
- अम्मार इक़बाल
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निकाल लाया हूँ एक पिंजरे से इक परिंदा
अब इस परिंदे के दिल से पिंजरा निकालना है
- उमैर नजमी
बिछड़ गए तो ये दिल 'उम्र भर लगेगा नहीं
लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं
- उमैर नजमी
बाग़ में दिल नहीं लगा अब के
अगले मौसम नहीं खिलूँगा मैं
- विशाल बाग़
जाते वक़्त तुझे तो हम हँसता देखेंगे
फिर आईने में ख़ुद का रोना देखेंगे
– अंकित मौर्या
पहले ही कम हसीन कहाँ था तुम्हारा ग़म
पहना दिया है उस को ग़ज़ल का लिबास और
– चराग़ शर्मा
आपका प्यार चाहिए मुझको
और लगातार चाहिए मुझको
- अश्वनी मित्तल 'ऐश'
थोड़ा सा गँवाता था उन्हें रोज़ मैं 'अबतर'
और रोज़ मुझे थोड़ा गँवाते थे पिता जी
और रोज़ मुझे थोड़ा गँवाते थे पिता जी
– अच्युतम यादव 'अबतर'
ज़िंदगी का हर वरक़ बा-शौक़ पढ़िए
ये किताब इक रोज़ लौटानी भी तो है
– अच्युतम यादव 'अबतर'
अश्क बन के बहें या क़ैद रहें
दिल की ख़ातिर ये ग़म नया सा है
– अच्युतम यादव 'अबतर'
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अव्वल आने का शौक़ था लेकिन
काम सारे ही दूसरे किए थे
- जव्वाद शैख़
नाक़िस असासा था मैं, मेरा रेज़ा-रेज़ा लग़्व
मिस्मार जो हुआ तो दुबारा न बन सका
– अच्युतम यादव 'अबतर'
मेरी ख़ुशबू को हवाओं में उड़ाने वाला
लौट के आया नहीं छोड़ के जाने वाला
- हिमांशी बाबरा
दिल ऐसे मुब्तला हुआ तेरे मलाल में
ज़ुल्फ़ें सफ़ेद हो गईं उन्नीस साल में
- हिमांशी बाबरा
ख़ुद ही जाने लगे थे और ख़ुद ही
रास्ता रोक कर खड़े हुए हैं
- अम्मार इक़बाल
थक गए हो तो थकन छोड़ के जा सकते हो
तुम मुझे वाक़ि'अतन छोड़ के जा सकते हो
- अम्मार इक़बाल
एक तारीख़ मुक़र्रर पे तो हर माह मिले
जैसे दफ़्तर में किसी शख़्स को तनख़्वाह मिले
- उमैर नजमी
तुम जो कहते थे ना इक दिन छू लोगे
छू लेते ना मेरा मन भी करता था
- विशाल बाग़
वो हँस के देखती होती तो उस से बात करते
कोई उम्मीद भी होती तो उस से बात करते
– चराग़ शर्मा
कुछ इस तरह दिल से इश्क़ उस का निकालना है
बग़ैर गुल्लक को तोड़े सिक्का निकालना है
बग़ैर गुल्लक को तोड़े सिक्का निकालना है
– चराग़ शर्मा
कह रहा था मैं नहीं है दुख किसी भी बात का
और छलक के गिर गया इक आँसू पिछली रात का
– अच्युतम यादव 'अबतर'
ऐसा लगता था शायद गिरा देंगी पर
पेड़ का दुख हवाओं ने आधा किया
– अच्युतम यादव 'अबतर'
मैं जानता हूँ मोहब्बतों का मक़ाम-ए-आख़िर
सो उस के कमरे से मुझ को पंखा निकालना है
– चराग़ शर्मा
ऐसे वो रो रहा था मिरा हाल देख कर
आया हुआ हो जैसे किसी इंतिक़ाल में
- हिमांशी बाबरा
मेरा ग़म जानते हैं बस दो लोग
आइने में वो आदमी और मैं
- अश्वनी मित्तल 'ऐश'
मुझे तिरे लिए ख़ुशियाँ ख़रीदनी हैं दोस्त
सो क्या मैं तेरी उदासी ख़रीद सकता हूँ
- अश्वनी मित्तल 'ऐश'
फिर भी बेताब हूँ कितना मैं तेरा होने को
जानता हूँ कि मेरा तू नहीं होने वाला
- वरुन आनन्द
हम नदी के दो किनारे मिलना तो मुमकिन नहीं
पर मिलेंगे एक दिन दोनों किनारे काट कर
– अंकित मौर्या
काश कि मैं भी होता पत्थर
गर था उन को प्यारा पत्थर
- वरुन आनन्द
मुस्कुराने से ग़म हुए थे अयाँ
ऐसे रोना है अब कि शाद लगूँ
– अच्युतम यादव 'अबतर'
इश्क़ कर लूँ मैं आप से यानी
आइना दिल लगा ले पत्थर से
- अश्वनी मित्तल 'ऐश'
तितली से दोस्ती न गुलाबों का शौक़ है
मेरी तरह उसे भी किताबों का शौक़ है
– चराग़ शर्मा
मिरी आँखों में गुंजाइश तो कम है
पर उस के ख़्वाब पूरे बैठते हैं
– चराग़ शर्मा
सिर्फ़ उसकी ही रज़ा से लोग साँसें ले रहे
और फिर भी पूछते हैं बन्दगी किस काम की
- तनोज दाधीच
इक बार मुझ को अपनी निगहबानी सौंप दे
'उम्रें गुज़ार दूँगी तिरी देख-भाल में
- हिमांशी बाबरा
तुम्हारी एक दिन की सोच है और
हमारा उम्र भर का तजरबा है
– ज़िया मज़कूर
जब मैं चाहूँगा छोड़ जाऊँगा
इक सराए है जिस्म जेल नईं
- अम्मार इक़बाल
उसकी तासीर ऐसे काटी है
हमने घोला उसे शराबों में
- विशाल बाग़
वर्ना तो नींद से भी नहीं कोई ख़ास रब्त
आँखों को सिर्फ़ आप के ख़्वाबों का शौक़ है
– चराग़ शर्मा
खुल गई अक़्ल बंदगी के बाद
ढूँढ़िए रब को आदमी के बाद
– अच्युतम यादव 'अबतर'
मेरी नज़रें तुझ पर ही होंगी
कहीं तू न आँखें चुरा ले
– अच्युतम यादव 'अबतर'
जिन को था फूल तोड़ना वो तोड़ लिए गए
माली लगा ही रह गया बस देख-भाल में
– अंकित मौर्या
मुझे तो तेरी बर्बादी भी बर्बादी नहीं लगती
कि मैं ने वो भी देखा है जो है बर्बाद से आगे
- हिमांशी बाबरा
टकरा रही है साँस मिरी उस की साँस से
दिल फिर भी दे रहा है सदा और पास और
– चराग़ शर्मा
तो दोस्तो, ये थी कुछ बेहतरीन दो लाइन की शायरी। मैंने नए दौर के बेहतरीन शायरों की शायरी ही पेश की है और उम्मीद करता हूँ आपको पसंद आई होगी। कॉमेट करके अपना पसंदीदा शे'र ज़रूर बताएँ। आप अपने परिवार व दोस्तों के साथ ये पोस्ट साझा कर सकते हैं। हमारे इस ब्लॉग पर बहुत से शायरों का शायरी संग्रह मौजूद है। आप उन्हें भी पढ़ सकते हैं। शुक्रिया।





1 टिप्पणियाँ
बहुत बधाई भाई अच्युतम ख़ूब चमको 🌹🌹
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